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पंचमुखी रुद्राक्ष की कीमत 251₹

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ज्योतिषाचार्य पंडित रमापति त्रिपाठी श्री अयोध्या जी पंचमुखी रुद्राक्ष को जांच पाताल करके पंचमुखी रुद्राक्ष का महाभिषेक करके पूरी भारत में ऑनलाइन डिलीवरी किया जाता है एवं उचित रेट पर पंचमुखी तीनमुखी  रुद्राक्ष पूरे भारत में दिया जाता है जिन बंधुओं को रुद्राक्ष वह इस नंबर पर पूरापता व्हाट्सप्प कर के खरीद सकते है 9648004809 WhatsApp 251₹  ज्योतिषाचार्य पंडित रमापति त्रिपाठी जी के बारे में लखनऊ, उत्तर प्रदेश लखनऊ और अयोध्या (सर्वोत्तम सेवा ऑनलाइन और ऑफलाइन)   हमारे विशेषज्ञ ज्योतिषी पंडित रमापति त्रिपाठी जी से मिलें जो ज्ञान और अनुभव का भंडार लेकर आते हैं। क्षेत्र में कई वर्षों के अनुभव के साथ, उन्होंने ज्योतिष की कला में महारत हासिल कर ली है और आपको सटीक रीडिंग और व्यावहारिक सलाह प्रदान कर सकते हैं। इसलिए, यदि आप अपनी यात्रा में मार्गदर्शन के लिए किसी दयालु और जानकार ज्योतिषी की तलाश कर रहे हैं, तो कहीं और मत जाइए। हमारा ज्योतिषी ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर करने और आपकी वास्तविक क्षमता का पता लगाने में आपकी मदद करने के लिए यहां है। विशेषज्ञता क्षेत्र ज्योत...

स्थानीय जन्म समय निकालने का नियम

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भारतीय स्टैण्डर टाइम 82°30 और स्थानीय  रेखांश का अंतर करें 4 से गुणा करके  60 से भाग दें ।  लब्धि और शेष जो बचेगा ।  वह देशांतर होगा स्थानीय जन्म समय के मिनट और सेकंड जोड़ेंगे या घटायेंगे भारतीय स्टैंडर्ड टाइम के रेखांश से स्थानीय रेखांश अधिक हो तो जोड़ेंगे कम हो तो घटाएंगे। एवं बेलांतर धन हो तो जोड़ेंगे ऋण हो तो घटाएंगे जो प्राप्त होगा वह शुद्ध समय होगा https://www.facebook.com/profile.php?id=100087607225357&mibextid=ZbWKwL ज्योतिषाचार्य पंडित रमापति त्रिपाठी (श्री अयोध्या जी) जहां पर ना समझ में आए  मेरे पास कमेंट करें मैं उसके बारे में आपको विस्तार से समझाऊंगा ज्योतिष गणित को सीखने के लिए पेज को फॉलो करें

विश्वकर्मा जयंती विशेष: श्री विश्वकर्मा भगवान की यह प्रार्थना हर सुबह पढ़नी चाहिए

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श्री विश्वकर्मा विश्व के भगवान सर्वाधारणम्।  शरणागतम् शरणागतम् शरणागतम् सुखाकारणम्।।  कर शंख चक्र गदा मद्दम त्रिशुल दुष्ट संहारणम्।  धनुबाण धारे निरखि छवि सुर नाग मुनि जन वारणम्।। डमरु कमण्डलु पुस्तकम् गज सुन्दरम् प्रभु धारणम्।  संसार हित कौशल कला मुख वेद निज उच्चारणम्।। त्रैताप मेटन हार हे ! कर्तार कष्ट निवारणम्।  नमस्तुते जगदीश जगदाधार ईश खरारणम्।।  सर्वज्ञ व्यापक सत्तचित आनंद सिरजनहारणम्।  सब करहिं स्तुति शेष शारदा पाहिनाथ पुकारणम्।।   श्री विश्वपति भगवत के जो चरण चित लव लांइ है।  करि विनय बहु विधि प्रेम सो सौभाग्य सो नर पाइ है।। संसार की सुख सम्पदा सब भांति सो नर पाइ है।  गहु शरण जाहिल करि कृपा भगवान तोहि अपनाई है।। प्रभुदित ह्रदय से जो सदा गुणगान प्रभु की गाइ है।  संसार सागर से अवति सो नर सुपध को पाइ है।। हे विश्वकर्मा विश्व के भगवान सर्वा धारणम्।  शरणागतम्। शरणागतम्। शरणागतम्। शरणागतम्।। श्री विश्वकर्मा भगवान की मुरति अजब विशाल।  भरि निज नैन विलोकिये तज...

राधा को नाम अनमोल बोलो राधे राधे ।

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राधा को नाम अनमोल बोलो राधे राधे । श्यामा को नाम अनमोल बोलो राधे राधे ॥ ब्रह्मा भी बोले राधे, विष्णु भी बोले राधे । शंकर के डमरू से आवाज़ आवे राधे राधे ॥ गंगा भी बोले राधे, यमुना भी बोले राधे । सरयू की धार से आवाज़ आवे राधे राधे ॥ चंदा भी बोले राधे, सूरज भी बोले राधे । तारो के मंडल से आवाज़ आवे राधे राधे ॥ गैया भी बोले राधे, बछड़ा भी बोले राधे । ढूध की धार से आवाज़ आवे राधे राधे ॥ गोपी भी बोले राधे, ग्वाले भी बोले राधे । राधा को नाम अनमोल बोलो राधे राधे ।

लिंगाष्टकम स्त्रोत्र

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ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगं निर्मलभासित शोभित लिंगम् | जन्मज दुःख विनाशक लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 1 ‖ देवमुनि प्रवरार्चित लिंगं कामदहन करुणाकर लिंगम् | रावण दर्प विनाशन लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 2 ‖ सर्व सुगंध सुलेपित लिंगं बुद्धि विवर्धन कारण लिंगम् | सिद्ध सुरासुर वंदित लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 3 ‖ कनक महामणि भूषित लिंगं फणिपति वेष्टित शोभित लिंगम् | दक्षसुयज्ञ विनाशन लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 4 ‖ कुंकुम चंदन लेपित लिंगं पंकज हार सुशोभित लिंगम् | संचित पाप विनाशन लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 5 ‖ देवगणार्चित सेवित लिंगं भावै-र्भक्तिभिरेव च लिंगम् | दिनकर कोटि प्रभाकर लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 6 ‖ अष्टदळोपरिवेष्टित लिंगं सर्वसमुद्भव कारण लिंगम् | अष्टदरिद्र विनाशन लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 7 ‖ सुरगुरु सुरवर पूजित लिंगं सुरवन पुष्प सदार्चित लिंगम् | परात्परं परमात्मक लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 8 ‖ लिंगाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेश्शिव सन्निधौ | शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ‖ इति श...

गुरु पूर्णिमा

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1²1 11 गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।1 गुरुरेव पूर्णब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।।1 गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः का हिंदी अर्थ गुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं, गुरु ही महादेव हैं। गुरु साक्षात् भगवान हैं, ऐसे श्री गुरु को प्रणाम है। यानि – गुरु निर्माता है, गुरु पालनहार है, गुरु ही संघटक है। गुरु ही परमात्मा हैं, ऐसे महान गुरु को नमन है। गुरु (शिक्षक/संरक्षक/मार्गदर्शक) ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं, गुरु महेश्वर हैं। गुरु स्वयं ही परमेश्वर है, ऐसे महान गुरु को नमस्कार है। आप सभी मित्रों एवं भक्तों को पंडित रमापति शास्त्री की तरफ से गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं आपके ऊपर श्री गुरुदेव भगवान की कृपा बनी रहे जय दादा परशुराम https://youtu.be/duuMaSLXmF4 गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः का अर्थ यह श्लोक "स्कन्द पुराण" के गुरुगीता (गुरुगीता) के गुरु-स्तोत्रम् से लिया गया है। गुरुगीता ने इसे पूरा अध्याय गुरु को स...

पार्वती पति हर हर शंभू पाहि पाहि दातार हरे

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जय शिवशंकर, जय गंगाधर, करुणा-कर करतार हरे, जय कैलाशी, जय अविनाशी, सुखराशि, सुख-सार हरे जय शशि-शेखर, जय डमरू-धर जय-जय प्रेमागार हरे, जय त्रिपुरारी, जय मदहारी, अमित अनन्त अपार हरे, निर्गुण जय जय, सगुण अनामय, निराकार साकार हरे। पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥ जय रामेश्वर, जय नागेश्वर वैद्यनाथ, केदार हरे, मल्लिकार्जुन, सोमनाथ, जय, महाकाल ओंकार हरे, त्र्यम्बकेश्वर, जय घुश्मेश्वर भीमेश्वर जगतार हरे, काशी-पति, श्री विश्वनाथ जय मंगलमय अघहार हरे, नील-कण्ठ जय, भूतनाथ जय मृत्युंजय अविकार हरे। पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥ नवग्रह ध्यान मंत्र https://youtube.com/shorts/fWKm2H_RZWE?feature=share जय महेश जय जय भवेश, जय आदिदेव महादेव विभो, किस मुख से हे गुणातीत प्रभु! तव अपार गुण वर्णन हो, जय भवकारक, तारक, हारक पातक-दारक शिव शम्भो, दीन दुःख हर सर्व सुखाकर, प्रेम सुधाकर दया करो पार लगा दो भव सागर से, बनकर करूणाधार हरे। पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥ https://youtu.be/WnEsQ4o0zkY जय मनभावन, जय अतिपावन, शोकनशावन,शिव शम्भो विपद विदारन, अध...