आरती करो शंकर की करो नटवर की करो

आरती करो हरिहर की करो,
नटवर की भोले शंकर की,
आरती करो शंकर की।।
सिर पर शशि का मुकुट संवारे,
तारों की पायल झनकारे,
धरती अम्बर डोले तांडव,
लीला से नटवर की,
आरती करो शंकर।
आरती करो हरि-हर की करो,
नटवर की भोले शंकर की,
आरती करो शंकर की।।
फणि का हार पहनने वाले,
शम्भू है जग के रखवाले,
सकल चराचर अगजग नाचे,
ऊँगली पर विषधर की,
आरती करो शंकर की।

ज्योतिषाचार्य पंडित रमापति त्रिपाठी
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