गुरु पूर्णिमा
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।1
गुरुरेव पूर्णब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।।1
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः का हिंदी अर्थ
गुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं, गुरु ही महादेव हैं। गुरु साक्षात् भगवान हैं, ऐसे श्री गुरु को प्रणाम है।
यानि –
गुरु निर्माता है, गुरु पालनहार है, गुरु ही संघटक है। गुरु ही परमात्मा हैं, ऐसे महान गुरु को नमन है।
गुरु (शिक्षक/संरक्षक/मार्गदर्शक) ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं, गुरु महेश्वर हैं। गुरु स्वयं ही परमेश्वर है, ऐसे महान गुरु को नमस्कार है।
आप सभी मित्रों एवं भक्तों को पंडित रमापति शास्त्री की तरफ से गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं आपके ऊपर श्री गुरुदेव भगवान की कृपा बनी रहे जय दादा परशुराम
https://youtu.be/duuMaSLXmF4
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः का अर्थ
यह श्लोक "स्कन्द पुराण" के गुरुगीता (गुरुगीता) के गुरु-स्तोत्रम् से लिया गया है। गुरुगीता ने इसे पूरा अध्याय गुरु को समर्पित कहा है। गुरु की महिमा अपरंपार है। हमने किसी भी शास्त्र, वेद, पुराण, उपनिषद, उठा लें, सभी में गुरु की महिमा बताई है। यदि जीवन में सिर पर गुरु का हाथ है तो फिर कुछ भी कर पाना संभव है। इस श्लोक में गुरु का महत्व बताया गया है। गुरु को परमात्मा तुल्य बताया गया है।गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः श्लोक के प्रत्येक शब्द का अर्थ
गुरु - 'गु' - अंधकार या अज्ञानता, 'रू' - दूर करने वाला। गुरु का अर्थ - अँधेरा या अज्ञानता दूर करने वाला।
ब्रह्मा - भगवान ब्रह्मा को शास्त्रों के अनुसार "सृष्टि का निर्माता" कहा जाता है।
विष्णु - भगवान विष्णु "पालनहार" कहा जाता है।
देवो - देवता
महेश्वर - भगवान महादेव "संघारक" कहा जाता है।
साक्षात् – स्वयं
परमब्रह्म – परमात्मा
तस्मै – ऐसे / होरा
श्रीगुरुवे - महान गुरु को
नमः - नमन / प्रणाम
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न - गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः श्लोक के प्रश्न
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः कहाँ से लिया गया है?
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः मंत्र "स्कंद पुराण" के गुरुगीता अध्याय के गुरु-स्तोत्रम् से लिया गया है।
गुरु स्त्रोतम् कहाँ से लिया गया है?
गुरु स्त्रोतम “स्कंद पुराण” के गुरुगीता अध्याय में है।
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः का अर्थ क्या है?
इस श्लोक का अर्थ है - गुरु ही निर्माता है, गुरु ही पालनहार है और गुरु ही संघटक है। अर्थात गुरु ही परमात्मा है, ऐसे महान गुरु को प्रणाम है।
संस्कृत में गुरु का क्या मतलब है?
संस्कृत में 'गु' का मतलब अंधकार या अज्ञानता होता है, और 'रू' का अर्थ दूर करने वाला होता है। इसलिए गुरु का अर्थ - अँधेरा या अज्ञानता दूर करने वाला या अँधेरे से प्रकाश की और ले जाने वाला।
आज की हिन्दू तिथि और पंचांग
सोमवार, 03 जुलाई 2023
मास आषाढ़
पक्ष शुक्ल
दिन सोमवार
तिथि आज की तिथि पूर्णिमा है।
पूर्णिमा सायं 05:08 बजे तक तथा उसके बाद प्रतिपदा प्रारम्भ हो जायेगी।
देव पूर्णिमा चंद्र देव, अग्नि प्रातिपदा
नक्षत्र मूल
योग ब्रह्म
करण विष्टि/बलाव
व्रत और त्यौहार गुरु पूर्णिमा 2023 |
विक्रम संवत 2080
गुरु पूर्णिमा
जवाब देंहटाएं